मस्त पंक्ति

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गाली जुबां पे हाथों में कट्टा
आंखों में लाली,चेहरे पे वहशत
ढाने चले हो किन मस्जिदों को
मारोगे आख़िर किन मुस्लिमों को
लगता है तुमको भगवान सच मूच
खुश होंगे ऐसे कामों से, बोलो 
हिंसा का ये पाठ है राम का किया?
या है हनुमान ने ही सिखाया ?
सोचो, अगर वो मिल जाएं, रह में
किया कुछ कहेंगे तुम से बताओ!!
मालूम है तुम हो ही निकम्मे 
शिक्षा न अच्छी न कोई नौकरी 
तुम ने सलीका सीखा नहीं है
हिंसा तुम्हें ये किस ने सिखाया 
देखो वो ख़ुद और फिर उनके बच्चे
किया कर रहे हैं और तुम कहां हो?
तुम ने कभी अपने कल का न सोचा 
अपने ही हाथों हत्या करो हो 
अपने ही कल की, अच्छे भविष्य की
अब भी समय है हिंसा को छोड़ो
तुम अच्छे होगे , कल अच्छा होगा !!!
सागर तैमी

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